नरसोबाची वाडी दत्त देवस्थान महाराष्ट्र

स्वामी दत्त देव या श्री दत्तात्रय को अर्पित एक मंदिर नृसिंहवाड़ी , कोल्हापुर जिले में , महाराष्ट्र में स्थित है। यह मंदिर सांगली से ४० किमी पर है।

ऐतिहासिक घटनाये - माना जाता है की महापुरुष श्रीपाद स्वामी ने एक ब्राह्मण स्त्री को अपना जीवन शेष करने की कोशिश में पाया और उन्होंने उस स्त्री से कहा की जाकर शिव की आराधना करे। उस स्त्री ने ऐसा ही किया और अगले जन्म में अकोला के पास अम्बा नाम से एक अच्छे घर में पैदा हुई। उसका विवाह माधव शर्मा से हुआ और उसको एक बेटा भी हुआ जो जन्म के समय रोया नहीं। उस बच्चे के मुख से ॐ का स्वर निकला। सब लोग आश्चर्य चकित थे और मानने लगे की ये शिव जी का अवतार है। उस बच्चे का नाम नरहरि पड़ा। जैसे ही वो बच्चा बड़ा हुआ उसने ब्रह्मचर्य ( संयम ) का जीवन व्यतीत करने का निर्णय लिया और सभी सांसारिक सुखों का त्याग कर दिया ।

अम्बा को पिछले जन्म की याद आ गयी और उसे पता चला की ये वही श्रीपाद है जिसने अम्बा की आत्महत्या रोकी थी । अम्बा ने नरहरि से कहा कि जब तक वह और बच्चों की माँ नहीं बन जाती तब तक वो उसके साथ रहे । अपनी मां के और बच्चो के जन्म देने के बाद ,वह पादुका पेहेन कर संसार का त्याग करने चला पड़ा । नरहरि ने बद्रीनाथ और काशी की यात्रा की और स्वामी कृष्णा सरस्वती को अपना गुरु माना। संन्यास का व्रत लिया और नरहरि , श्री नरसिंह सरस्वती स्वामी के रूप में जाना जाने लगे ।

नरसोबा वाड़ी श्री दत्तात्रय के भक्तो में पावन तीर्थ है क्युकी उनके अवतार नरसिंह सरस्वती यहाँ १२ वर्ष औदुम्बर के वृक्षों तले ध्यान करते थे। वास्तविक रूप में इस मंदिर में भगवान की कोई मूर्ति नहीं है। उनकी लकड़ी की चप्पल या पादुका अभी भी इस मंदिर में रखी है ।

विशेषताए - यह मंदिर एक सुन्दर स्थान पर स्थित है। यहाँ पांच गंगा का मेल होता है जो ५ पावन नदियों - शिवा , भद्रा , कुम्भी , भगवती और सरस्वती का मेल है। यहाँ पर ये नदिया कृष्णा नदी में मिश्रित होती है।

त्यौहार/समारोह - प्रतिदिन यहाँ पूजा की जाती है जिसमे देवता को फल, फूल और पान चढ़ाते है। हर शाम देवता की पालकी यात्रा पर निकलती है और भजन गाये जाते है। यह यात्रा चातुर्मास (वर्षा के ४ महीने) नहीं की जाती।

दत्त जयंती, नरसिंह जयंती और गोकुल अष्टमी यहाँ के मुख्य त्यौहार है।

भक्त नदी में उतरते हुए "दिगम्बरा दिगम्बरा श्रीपादवल्लभ दिगम्बरा" का जाप करते है।

दिशा निर्देश :
रोड से - महाराष्ट्र के किसी भी शेहेर से यहाँ तक आसानी से यात्रा की जा सकती है। यह स्थान सांगली से ४० किमी और कोल्हापुर से करीब ५० किमी पर है। मिराज,कोल्हापुर और सांगली से यहाँ तक के एस टी बसे भी मिलती है।
ट्रैन से - जयसिंगपुर स्टेशन सबसे निकटतम स्टेशन है जो कोल्हापुर मिराज मार्ग पर है।

अधिक जानकारी तथा चित्रो के लिए कोल्हापुर पर्यटन का यह संकेत स्थल देखिये - Narsobawadi Datta Temple

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