बनारस वाराणसी के घाट

बनारस (वाराणसी) हमेशा प्राचीन भारत में धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व के लिए जाना जाता आया है। यह शहर गंगा नदी के तट पर है। गंगा के तट पर नदी तक पोहोचने के लिए कुछ सीढ़िया है। इन्हे घाट कहते है। इस शहर में ८७ घात है। इन घाटो का उपयोग पूजा अर्चना,धार्मिक अनुष्ठानों और यहां तक ​​कि अंतिम संस्कार के अनुष्ठानों के लिए किये जाते है। लोग अक्सर इन घाटो पर नौका यात्रा करते है। यह नौकाएं दशाश्वमेध घाट से हरिश्चंद्र घाट तक ले जाती है। क्युकी यहाँ पानी का स्टार काम है , इन घाटो की चलते हुए भी यात्रा की जा सकती है।

बनारस के सभी घाटो की सूची निम्नलिखित है -

• माता आनंदमई घाट
• अस्सी घाट
• अहिल्या घाट
• आदि केशव घाट
• अहिल्याबाई घाट
• बद्री नारायण घाट
• बाजीराव घाट
• बाउली / उमराओगिरी / अमरोहा घाट
• भंडाइनी घाट
• भोसले घाट
• ब्रह्मा घाट
• बूंदी परकोटा घाट
• चऊकी घाट
• चौसट्ठी घाट
• चेत सिंह घाट
• दांडी घाट
• दरभंगा घाट
• दशाश्वमेध घाट
• दिग्पतिआ घाट
• दुर्गा घाट
• गंगा महल घाट (मैं)
• गंगा महल घाट (द्वितीय)
• गाय घाट
• गौरी शंकर घाट
• गणेशा घाट
• गोला घाट
• गुलारिआ घाट
• हनुमान घाट
• हनुमानगरधि घाट
• हरीश चंद्र घाट
• जैन घाट
• जलसई घाट
• जानकी घाट
• जतारा घाट
• कर्नाटक राज्य घाट
• केदार घाट
• खिरकिया घाट
• श्री गुरु रविदास घाट
• खोरी घाट
• लाला घाट
• लाली घाट
• ललिता घाट
• महानिर्वाणी घाट
• मन मंदिरा घाट
• मानसरोवर घाट
• मंगला गौरी घाट
• मणिकर्णिका घाट
• मेहता घाट
• मीर घाट
• मुंशी घाट
• नंदेश्वर घाट
• नारद घाट
• नया घाट
• नेपाली घाट
• निरंजनी घाट
• निषाद घाट
• पुराना हनुमाना घाट
• पंचगंगा घाट
• पंचकोटा
• पांडे घाट
• फूटा घाट
• प्रभु घाट
• प्रह्लाद घाट
• प्रयाग घाट
• राजघाट पेशवा अमृतराओ द्वारा बनाया गया
• राजा घाट / दुफ्फरीन पुल / मालवीय पुल
• राजा ग्वालियर घाट
• राजेंद्र प्रसाद घाट
• राम घाट
• राणा महला घाट
• रेवन घाट
• सक्का घाट
• संकठा घाट
• सर्वेश्वर घाट
• सिंधिया घाट
• शिवाला घाट
• शीतला देवी घाट
• शीतला घाट
• सामने घाट
• सोमेश्वर घाट
• टेलिनाला घाट
• त्रिलोचन घाट
• त्रिपुरा भैरवी घाट
• तुलसी घाट
• वच्छराज घाट
• वेणीमाधव घाट
• विजयनगरम घाट
 

इन घाटो का निर्माण १७ वि सदी में किया गया। इन घाटों में से अधिकांश मराठों , सिंधिया , होलकर और पेशवा के शासनकाल के दौरान बनाया गया है। यह परिवारों अभी भी कुछ घाटो के संरक्षक हैं। कुछ घाट निजी स्वामित्व में हैं ।

ज्यादातर घाटो का प्रयोग आध्यात्मिक और धार्मिक ज्ञान के लिए किया जाता है। परन्तु ये घाट बेहद लोकप्रिय पर्यटक आकर्षण हैं। फोटोग्राफरों की भीड़ से सारी दुनिया में इस जगह पर आती है। तीर्थयात्रि और योगि सूर्योदय के दौरान उनकी सुबह पूजा प्रदर्शन करने के लिए यहां आते हैं। सूर्यास्त में एक महा आरती (नदी पूजा) की जाती है। यह महा आरती दशाश्वमेध घाट पर की जाती है।

गंगा आरती

गंगा आरती

 मणिकर्णिका घाट दशाश्वमेध घाट सारनाथ में तिब्बती मंदिर

 मणिकर्णिका घाट दशाश्वमेध घाट सारनाथ में तिब्बती मंदिर

नीचे दिए गए सूची में हम बनारस के प्रसिद्ध घाटों पर नजर डालते हैं :-

दशाश्वमेध घाट - इस घाट को इस शहर में सबसे प्रसिद्ध घाट कहना है कि गलत नहीं होगा । यह सबसे पुराना घाट माना जाता है और गंगा आरती इसी जगह की जाती है।

मणिकर्णिका घाट - इस घाट पर दाह संस्कार के आयोजित होते हैं। क्योंकियह घाट भी बर्निंग घाट (ज्वलंत) के रूप में जाना जाता है। यह इस घाट पर आग लगातार 2500 वर्ष के बाद से जल रही है यह माना जाता है ।

हरीश चंद्र घाट - यह घाट राजा हरीश चंद्र के नाम पर है। राजा हरसिंहचन्द्र ने हमेशा सच बोलने का संकल्प लिया। लोगो का मानना है की जिन भक्तों यहाँ अंतिम संस्कार किया जाता है, वह मोक्ष (मुक्ति) प्राप्त करते है । इस घाट को "आदि मणिकर्णिका" के रूप में जाना जाता है।

अस्सी घाट - यह घाट अस्सी नदी और गंगा नदी के मिलाप पर है / यह घाट दूर दक्षिण कोने पर है। यहाँ एक शिवलिंग है जो एक पीपल वृक्ष के नीचे है। यहाँ लोगों को भगवान शिव की पूजा में देखा जाता है।

तुलसी घाट - यह घाट प्रसिद्ध कवि और संत तुलसीदास के नाम पर है। कार्तिक (अक्टूबर-नवम्बर) के हिंदू महीने में, एक कृष्ण पूजा समारोह यहां आयोजित किया जाता है।

चेट सिंह घाट - यह स्थान महाराजा चेट सिंह १८ वीं सदी में अंग्रेजों से लड़ाई की जगह है।

दरभंगा घाट - महान वास्तुकला का एक आदर्श उदाहरण दरभंगा घाट है जो बिहार के शाही परिवार द्वारा 1990 के दशक में बनाया गया एक महल है है। यह बिहार के तत्कालीन वित्त मंत्री नारायण मुंशी द्वारा 1912 में पुनः बनाया गया था।

मैन मंदिर घाट - जयपुर के महाराजा मान सिंह ने १६०० में इस घाट का निर्माण किया। इस घाट पर पूर्ण राजपूत वास्तुकला से बना एक महल है। सवाई जयसिंह द्वितीय ने १७३० में यहाँ एक खगोल विज्ञान वेधशाला बनायीं थी ।

सिंधिया घाट - यह घाट जलती मणिकर्णिका घाट के पास है, परन्तु यह एक शांत जगह है। यह सिंधिया (शिंदे) के परिवार संरक्षण में है। यहां सबसे बड़ा आकर्षण आंशिक रूप से पानी में डूबा एक शिव मंदिर है।

भोसले घाट - यह घाट मराठा शैली का विशिष्ट नमूना है। यहाँ एक भव्य पत्थर के घरों के निर्माण मराठो के काल में किया गया।

दत्तात्रेय घाट - यह घाट दत्तात्रेय नाम के एक ब्राह्मण संत के पदचिह्न के कारण जाना जाता है। इस घाट के पास संत को अर्पित एक छोटा सा मंदिर है।

पंचगंगा घाट - यह जगह है, जहां पांच नदियों गंगा, यमुना, सरस्वती, किराना, और धूतपाप का मिलाप है। यह जगह औरंगजेब ने बनवाये आलमगीर मस्जिद के लिए जाना जाता है।

राजघाट - इस घाट को आदि केशव घाट के रूप में जाना जाता है क्युकी यहाँ आदि केशव विष्णु मंदिर है। यह माना जाता है की श्री विष्णु ने पहले बनारस में यहां अपने कदम डाले।

इन घाटो के अलावा यहाँ केदार घाट, मानसरोवर घाट, मीर घाट , ललिता घाट आदि जैसे अन्य प्रसिद्ध घाट भी है। आगंतुकों और श्रद्धालुओं को इन घाटों का दौरा करने और उनकी सुंदरता , अद्भुत माहौल , रोशनी और रंगीन भीड़ अनुभव करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है । आत्मा की खोज या आध्यात्मिकता या भी शौकिया फोटोग्राफि में रुचि रखने वाले लोगों के लिए बनारस घाट का दौरा आवश्यक है। बनारस घाट हर किसी के लिए कुछ करने की पेश करता है।

प्रमुख त्योहार - गंगा त्योहार सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है । छठ पूजा ( सूर्य देवता की पूजा ) जिसमे उपवास और पानी में खड़े पूजा की जाती हैं, भी यहाँ मनाया जाता है। इस त्यौहार में सूरज की प्रार्थना करते हैं । हिंदू त्योहार महीने ( सितम्बर - नवम्बर) के दौरान, इन घाटों भारी भीड़ जमा होती है । राम नवमी , दशहरा , दीवाली, शिवरात्रि और कार्तिक पूर्णिमा यहाँ पे मनाये जाने वाले बड़े समारोहों हैं ।

दिशा निर्देश
ट्रैन से -बनारस देश के सभी प्रमुख शहरों के साथ रेलवे लाइन पर अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। प्रमुख रेलवे स्टेशनों बनारस जंक्शन, मुगलसराय और मन्दुअदिह हैं।
हवाई अड्डा - पास का हवाई अड्डा लाल बहादुर शास्त्री हवाई अड्डा है।
सड़क मार्ग - यात्रा ऑपरेटरों और राज्य परिवहन निगम की बसों के निर्धारित समय पर चलते हैं। आगंतुकों को गंगा के किनारे ले जाने के लिए बस स्टेशन से एक टुक - टुक ले जा सकते हैं ।

निकट के स्थल
• मंदिर - गौरी माता मंदिर , काल भैरव मंदिर , दुर्गा मंदिर , सारनाथ मंदिर
• बनारस हिंदू विश्वविद्यालय
• चुनार का किला
• रामनगर किला

Translated By Ananya

Address

  • बनारस वाराणसी के घाट
    Varanasi

    Varanasi, Uttar Pradesh - 221002
  • Media

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