ॐ जाप के लाभ

ॐ जाप के लाभ

किसी भी हिंदू परिवार के बच्चे से पूछे तो बचपन ने एक बार ही सही पर दादी/नानी ने चुप चाप एक जगह बैठकर ॐ का जाप करने उसे जरूर कहा है। माँ और ददिमाये इस जाप को चंचल बच्चो को चुप करवाने के लिए इस्तेमाल करते है। जिसे हमने दादीमा के पुराने नुस्खे समझ कर छोड़ दिया था, वाही चीज़ आज विज्ञानं के युग में शरिर और मन को स्वस्थ बनाये रखने के उपाय के रूप में सामने आ रही है।

आजकल अधिक से अधिक लोग सूर्य नमस्कार, योग और उसके रूपों की ओर आकर्षित हो रहे है। इसी के साथ साथ ध्यान या जाप की सदियों पुरानी भारतीय पद्धति भी जनप्रिय हो रही हैं । ध्यान प्रसिद्ध इसलिए होता जा रहा है, क्युकी योग की तरह ध्यान करने में कोई शारीरिक बाधा नहीं है । कोई भी , कहीं भी यह कर सकता है ।

ऐसे लाभकारी अभ्यास में से एक, "ओम " का जप है । किसी भी मंत्र या पवित्र कविता सिर्फ एक ध्वनि या विभिन्न शब्दों की एक वाणी है । विज्ञान के अनुसार ध्वनि और कंपन एक साथ होते है । जहा कंपन है, वहा ऊर्जा निर्माण होगी। इसलिए, योगिओ और आध्यात्मिक गुरुओ के अनुसार यह मंत्र हमारे शरीर में कुछ ऊर्जा को सक्रिय करने के लिए उचित होगा।

आध्यात्मिक संबंध :-

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, ओम या ओमकार; ब्रह्मा (निर्माता) , विष्णु ( रक्षक ) और शिव ( मुक्तिदाता ) का प्रतीक है। "ओम " के जप हमारे भीतर परमात्मा की दैवी ऊर्जा (शक्ति) विकसित होती है।
ॐ की ध्वनि को बीजमंत्र या ब्रह्मांड की पहली आवाज है कि माना जाता है। इसलिए इस मन्त्र का जाप कर हम प्रकृति के साथ एक हो जाते हैं।

जाप कैसे करे :-

एकांत का एक समय चुनें।
एक आराम जगह का चयन करें।
ध्यान केंद्रित करने और दैनिक गतिविधियों के विचार से अपने दिमाग को साफ करने का प्रयास करें।
गहरी साँस ले ।
कमलासन की स्थिति में बैठें और अपनी पीठ को सीधा रखें।
धीरे-धीरे गहरी श्वास ले और श्वाश छोड़ते समय ओम का उच्चार करे। यहाँ ओम का उच्चार औ -उ-म इन तीन शबो द्वारा होना चाहिए ओम की ध्वनि अंतिम अक्षर 'म ' पर जोर देने के साथ लंबा खींचिए।
इस जाप को काम या ज्यादा समय जैसे आपकी इच्छा हो वैसे करे
इस मन्त्र का जाप रोज़ करने से ही लाभ प्राप्त होता है।

लाभ: -

आम धारणा के विपरीत , ओम का जाप जरूरी नहीं कि एक धार्मिक प्रतीक हो । संक्षेप में, यह एक एक बुनियादी ध्वनि है, जो मानव शरीर में कुछ कंपन पैदा करता है।
ओ - की ध्वनि से पेट में उ - की ध्वनि से सीने में और म - से नासिका में कम्पन पैदा होती हैं।
कुछ लोगों मानना है की ओम का जाप एकाग्रता में सुधार लाता ​​है । शायद पहली बार मन अस्थिर हो, लेकिन नियमित रूप से जप से ध्यान केंद्रित किया जा सकता है। ध्यान केंद्रित करने से तनाव और बेचैनी कम कर सकते हैं।
कुछ चिकित्सा निष्कर्षों के अनुसार इस मन्त्र के जाप से रक्तचाप को कम करने में मदद मिलेगी और दिल के स्वास्थ्य में सुधार कर सकते हैं।
इस ध्यान के लिए हर दिन समय निश्चित करने पर शांति की भावना महसूस होगी। यह दैनिक दिनचर्या में फसे लोगो के लिए लाभकारक है और उदासी से बच सकते है।
कई योग कक्षाओं में अक्सर ओम के मंत्र के साथ शुरू किय जाता है। किसी भी व्यायाम से पहले अगर ध्यान केंद्रित है, तो शरीर की गतिविधिया बेहतर बन सकती है।
कमलासन में बैठने से आसन में सुधार और रीढ़ संरेखण में सुधार हो सकता है ।

नीचे दिए गए कुछ वैज्ञानिक लेखो में ॐ के उच्चार के कुछ शोध दिए गए है -

http://paper.ijcsns.org/07_book/200808/20080825.pdf
http://nopr.niscair.res.in/bitstream/123456789/9347/1/IJTK%203(2)%20154-161.pdf

Address

  • Media

    Sorry!!, Currently we don't have media for this

Most Read Articles